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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

अश्वगंधा के फायदे | Ashwagandha Benefits in Ayurveda


 अश्वगंधा के फायदे | Ashwagandha Benefits in Ayurveda

अश्वगंधा (Withania Somnifera) आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध और शक्तिशाली जड़ी-बूटी है, जिसे इंडियन जिनसेंग भी कहा जाता है। इसके सेवन से शरीर को बल, ऊर्जा, और मानसिक शांति मिलती है। आयुर्वेद में इसे रसायन वर्ग की औषधि माना गया है, जो शरीर को पुनर्जीवित करने का कार्य करती है।
अश्वगंधा के मुख्य फायदे
1. तनाव और चिंता कम करे
अश्वगंधा प्राकृतिक एडेप्टोजेन है, जो शरीर को तनाव से लड़ने की क्षमता देता है। यह कॉर्टिसोल हार्मोन को संतुलित करता है और मन को शांत करता है।
2. नींद में सुधार
अनिद्रा और बेचैनी से परेशान लोगों को अश्वगंधा की जड़ का पाउडर दूध के साथ लेने से गहरी और सुकूनभरी नींद आती है।
3. रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
अश्वगंधा का नियमित सेवन शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाता है।
4. शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति बढ़ाए
कमज़ोरी, थकान और मांसपेशियों की कमजोरी में यह अमृत समान है। खिलाड़ियों और जिम करने वालों के लिए यह बहुत लाभकारी है।
5. पुरुषों के लिए लाभकारी
अश्वगंधा शुक्राणु संख्या और गुणवत्ता को सुधारती है। यह वीर्य को गाढ़ा और पोषक बनाती है तथा यौन शक्ति बढ़ाती है।
6. हड्डियों और जोड़ों के लिए
वृद्धावस्था में होने वाले गठिया और कमज़ोर हड्डियों में यह ताकत देती है और दर्द कम करती है।
7. हृदय और रक्तचाप के लिए
यह रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद करती है और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
अश्वगंधा का सेवन कैसे करें?
• पाउडर (चूर्ण): 3–5 ग्राम दूध या गुनगुने पानी के साथ
• कैप्सूल/टैबलेट: डॉ. की सलाह अनुसार
• अश्वगंधा लेह्य या अवलेह: बल और शक्ति बढ़ाने के लिए
सावधानियाँ
• गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
• अत्यधिक मात्रा में सेवन से पेट ख़राब हो सकता है।
• किसी गंभीर रोग में पहले विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करें।
निष्कर्ष
अश्वगंधा एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जो शरीर, मन और आत्मा—तीनों को ऊर्जा और शांति प्रदान करती है। यह तनाव को दूर कर, शक्ति बढ़ाती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। सही मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह से इसका सेवन करना हमेशा लाभकारी है

प्रोस्टेट का आयुर्वेद में इलाज: प्राकृतिक तरीके, जीवनशैली और शास्त्रीय औषधियाँ हिंदी में




प्रोस्टेट का आयुर्वेद में इलाज: प्राकृतिक तरीके, जीवनशैली और शास्त्रीय औषधियाँ


प्रोस्टेट क्या है?

प्रोस्टेट पुरुषों में मूत्राशय के नीचे स्थित एक छोटी ग्रंथि होती है। बढ़ती उम्र के साथ इसका आकार बढ़ना सामान्य है। 50 वर्ष की आयु के बाद कई पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ने (Benign Prostatic Hyperplasia - BPH) की समस्या देखी जाती है।

प्रोस्टेट बढ़ने के सामान्य लक्षण

  • बार-बार पेशाब आना, विशेषकर रात में।
  • पेशाब शुरू करने में कठिनाई।
  • पेशाब की धार का कमजोर होना।
  • पेशाब के बाद भी मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास।
  • पेशाब करते समय रुक-रुक कर आना।
  • कभी-कभी पेशाब में जलन या संक्रमण होना।

आयुर्वेद में प्रोस्टेट की व्याख्या

आयुर्वेद में यह समस्या मुख्यतः वात दोष, अपान वायु की विकृति तथा मूत्रवह स्रोतस के विकार से संबंधित मानी जाती है। उपचार का उद्देश्य केवल लक्षणों को कम करना नहीं, बल्कि दोषों का संतुलन, मूत्रमार्ग की कार्यक्षमता में सुधार और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाना होता है।

आयुर्वेदिक शास्त्रीय औषधियाँ

ध्यान दें: निम्न औषधियों का सेवन केवल योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से करें।

  • चंद्रप्रभा वटी
  • गोक्षुरादि गुग्गुल
  • पुनर्नवादि गुग्गुल
  • वरुणादि काढ़ा
  • चंद्रप्रभा वटी के साथ गोक्षुर एवं वरुण युक्त योग
  • पुनर्नवासव (रोगी की स्थिति के अनुसार)

रोगी की आयु, लक्षण, रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य रोगों को ध्यान में रखकर औषधियों का चयन किया जाता है।

उपयोगी आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पतियाँ

  • वरुण (Varuna): मूत्रमार्ग के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी।
  • गोक्षुर (Gokshura): मूत्र प्रवाह को सामान्य बनाए रखने में सहायक।
  • पुनर्नवा (Punarnava): सूजन कम करने और मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभदायक।
  • शिलाजीत: उचित रोगी में शक्ति एवं मूत्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

जीवनशैली में आवश्यक बदलाव

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ, लेकिन सोने से 2–3 घंटे पहले अधिक पानी न लें।
  • पेशाब को लंबे समय तक न रोकें।
  • चाय, कॉफी और शराब का सीमित सेवन करें।
  • प्रतिदिन 30–40 मिनट टहलें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • कब्ज न होने दें, क्योंकि इससे लक्षण बढ़ सकते हैं।
  • योग में अश्विनी मुद्रा, मूलबंध तथा हल्के प्राणायाम चिकित्सकीय सलाह से करें।

क्या खाएँ?

  • लौकी, तोरी, परवल, करेला जैसी हल्की सब्जियाँ।
  • जौ, पुराना गेहूँ, मूंग दाल।
  • कद्दू के बीज (सीमित मात्रा में)।
  • ताजे फल और रेशेदार आहार।

किन चीज़ों से बचें?

  • अत्यधिक तला-भुना भोजन।
  • बहुत अधिक मिर्च-मसाले।
  • धूम्रपान और शराब।
  • देर रात तक जागना।
  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहना।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

यदि निम्न में से कोई लक्षण हो तो तुरंत चिकित्सकीय जाँच कराएँ:

  • बिल्कुल पेशाब न आना।
  • पेशाब में खून आना।
  • तेज बुखार के साथ पेशाब में दर्द।
  • असहनीय दर्द या बार-बार संक्रमण।

निष्कर्ष

प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या उम्र बढ़ने के साथ सामान्य हो सकती है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में संतुलित आहार, उचित दिनचर्या, योग और रोगी की प्रकृति के अनुसार शास्त्रीय औषधियों के माध्यम से इस समस्या के प्रबंधन का प्रयास किया जाता है। किसी भी औषधि का सेवन स्वयं न करें; योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेकर ही उपचार प्रारंभ करें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी चिकित्सकीय परामर्श, जाँच या उपचार का विकल्प नहीं है।

हरे पत्तों का साग खाने के फायदे और नुकसान|Health Benefits

 हरे पत्तों का साग खाने के फायदे और नुकसान|Health Benefits

हरे पत्तों का साग

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हरे पत्तों का साग (जैसे पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, चौलाई आदि) पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। हालांकि, इनके अत्यधिक सेवन से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। आइए, इनके फायदे और नुकसान पर चर्चा करें:


फायदे:–

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पोषण से भरपूर:–

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हरे पत्तेदार साग आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, सी, के और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देते हैं।


पाचन सुधारता है:–

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इन सागों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या को कम करता है।


रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना:–

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विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है।


हड्डियों को मजबूत करता है:–

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कैल्शियम और विटामिन के हड्डियों को मजबूत बनाए रखते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बचाव करते हैं।


रक्त शुद्धिकरण:–

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हरे पत्तेदार सब्जियां रक्त को साफ करती हैं और हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मददगार होती हैं।


दिल की सेहत में सुधार:–

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इन सागों में पोटेशियम और फोलेट होता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।


वजन घटाने में सहायक:–

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कम कैलोरी और उच्च पोषण मूल्य के कारण यह वजन घटाने में मदद करते हैं।


नुकसान:–

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ऑक्सालेट का उच्च स्तर:

पालक और अन्य सागों में ऑक्सालेट की अधिकता होती है, जो किडनी स्टोन का कारण बन सकती है।


थायरॉयड पर प्रभाव:–

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कुछ पत्तेदार साग (जैसे पालक और गोभी) गोइट्रोजेनिक होते हैं, जो थायरॉयड ग्रंथि की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।


गैस और अपच की समस्या:–

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अत्यधिक मात्रा में सेवन से गैस और अपच हो सकती है।


एलर्जी का खतरा:–

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कुछ लोगों को साग से एलर्जी हो सकती है, जिससे खुजली, सूजन या पेट की समस्या हो सकती है।


पेस्टीसाइड का जोखिम:–

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बाजार में मिलने वाले साग में कीटनाशकों का उपयोग हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन्हें अच्छे से धोकर खाना चाहिए।


सावधानियां:–

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हमेशा ताजे और जैविक साग का उपयोग करें।

पत्तों को अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाएं।

यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर साग का सेवन करें।

हरे पत्तेदार साग संतुलित मात्रा में सेवन करने से स्वास्थ्य को कई लाभ मिल सकते हैं।

गुरुवार, 18 सितंबर 2025

बुजुर्गों को खाने योग्य ड्राई फ्रूट in hindi.

 बुजुर्गों को खाने योग्य ड्राई फ्रूट in hindi. 

#बादाम (Almonds)
• दिमाग और हड्डियों को मजबूत करते हैं।
• भीगे हुए बादाम सुबह देना बेहतर है, छिलका उतारकर।
• पाचन पर हल्का बोझ डालते हैं, इसलिए सीमित मात्रा (4–5)।
#अखरोट (Walnuts)
• दिमाग और हृदय के लिए अमृत समान।
• ओमेगा-3 फैटी एसिड बुजुर्गों में याददाश्त और डिप्रेशन कम करते हैं।
• 1–2 अखरोट रोज़ पर्याप्त हैं।
#काजू (Cashew)
• इसमें आयरन और जिंक होता है, लेकिन तैलीय और भारी होते हैं।
• कमजोरी और एनीमिया वाले बुजुर्गों के लिए थोड़ी मात्रा (2–3 दाने)।
#पिस्ता (Pistachio)
• हृदय और ब्लड शुगर संतुलन में सहायक।
• 5–6 पिस्ते रोज़ ले सकते हैं।
#अंजीर (Fig)
• कब्ज दूर करता है, कैल्शियम और आयरन से भरपूर।
• रात को भिगोकर सुबह देना सर्वोत्तम।
#किशमिश (Raisins)
• खून बढ़ाती है और कब्ज मिटाती है।
• 8–10 किशमिश भीगी हुई, सुबह बहुत फायदेमंद।
#मखाने (Fox Nuts)
• हल्के, पचने में आसान, बुजुर्गों के लिए उत्तम स्नैक।
❌ बुजुर्गों को कम या बिल्कुल नहीं खाने चाहिए
• बहुत ज़्यादा काजू और बादाम – ज्यादा खाने से पाचन पर बोझ, गैस और कब्ज हो सकती है।
• खजूर (Dates) – बहुत मीठे होते हैं, डायबिटीज़ वाले बुजुर्गों को नुकसानदेह।
• ब्राज़ील नट (Brazil Nut) – इसमें सेलेनियम बहुत अधिक होता है, अधिक सेवन से हड्डी व किडनी पर असर डाल सकता है।
• नमक लगे व रोस्टेड ड्राई फ्रूट – इसमें सोडियम और तेल ज्यादा होने से BP, हार्ट और किडनी के मरीजों को हानि।
• तैलीय ड्राई फ्रूट (जैसे मूंगफली ज़्यादा मात्रा में) – गैस और एसिडिटी कर सकते हैं।
⚖️ बुजुर्गों के लिए सही मात्रा
• बादाम – 4–5
• अखरोट – 1–2
• किशमिश – 8–10
• अंजीर – 1–2
• काजू – 2–3
• पिस्ता – 5–6
👉 सभी को दिनभर में अलग-अलग समय पर देना उचित है, न कि एक साथ।

गुरुवार, 24 अप्रैल 2025

जाने आयुर्वेद के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्खे – बिना दवा के राहत

 जाने आयुर्वेद के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्खे – बिना दवा के राहत


नमस्कार,

मैं Dr. Virender, आपका अपना आयुर्वेदिक मित्र। आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ कुछ ऐसे सरल और प्रभावी घरेलू नुस्खे, जो बरसों से आज़माए जा रहे हैं – बिना किसी साइड इफेक्ट के।


1. पेट की गैस और अपच – 

अजवाइन का कमाल

रात को सोते समय एक चुटकी अजवाइन में काला नमक मिलाकर गर्म पानी से लें। गैस, अपच और पेट दर्द से राहत मिलेगी।


2. सर्दी-जुकाम – 

तुलसी और अदरक का काढ़ा

तुलसी, अदरक, काली मिर्च और गुड़ का काढ़ा सुबह-शाम लेने से सर्दी और जुकाम में आराम मिलता है।


3. जोड़ों का दर्द – 

सरसों तेल और लहसुन

सरसों के तेल में लहसुन पकाकर मालिश करें। पुराने जोड़ों के दर्द में भी लाभदायक है।


4. नींद न आना – 

गाय के दूध में जायफल

रात को गर्म दूध में एक चुटकी जायफल मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।


5. बालों का झड़ना – 

आंवला और ब्राह्मी का उपयोग

सप्ताह में दो बार आंवला और ब्राह्मी का तेल लगाने से बाल मजबूत और घने होते हैं।


नोट:

ये सभी उपाय सामान्य स्वास्थ्य के लिए हैं। किसी रोग की गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


आपकी सेवा में सदैव,

Dr. Virender

Arogya Amrit – Ayurveda Clinic

शनिवार, 24 फ़रवरी 2024

बसंत ऋतु में होने वाले रोग


 बसंत ऋतु में होने वाले रोग

#डा०वीरेंद्र मढान

#बसंत ऋतु:-

यह ऋतु सर्दी और गर्मी का मिश्रण होता है,

इस ऋतु के आने पर मौसम सुहावना हो जाता है, सर्दी कम हो जाती है,  पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं, आम के पेड़ बौरों से लद जाते हैं और खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं । इस कारण से राग रंग और उत्सव मनाने के लिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी गई है इस ऋतु को ऋतुराज कहा गया है।

#बसंत ऋतु मे कौनसे रोग होते है:–

इस ऋतु में कफ से कुपित होने के कारण से 

- खांसी, सर्दी, जुकाम, श्वास, भूख न लगना, अपच, स्रोतों का अवरोध, गले की खराश, त्वचा रोग, बुखार, शरीर में भारीपन, अतिनिंद्रा, दस्त, खसरा आदि का खास प्रकोप होता है। 

वसंत ऋतु में सबसे आम बीमारियाँ मौसमी एलर्जी, अस्थमा आदि रोग होते है

एडेनोवायरस के कारण होने वाली श्वसन संबंधी बीमारी और एलर्जी संबंधी गुलाबी आँख हैं 

बाहरी परागकण और फफूंद समस्याएँ पैदा कर सकते हैं, लेकिन पालतू जानवरों की रूसी और धूल के कण जैसे इनडोर ट्रिगर भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

#बसंत ऋतु के रोगों के नाम:–

1-अस्थमा

2-फ्लू

3-पेट में दर्द

4-खांसी

5-गले में दर्द

6-आंख आना

7-कीड़े-मकोड़े की एलर्जी

8-पेट में अल्सर

9-नाक बंद होना

10-छाती में जकड़न

11-सिरदर्द

12-पेट में गैस बनना, आदि


#वसंत में आहार विहार :–

#क्या करें?

 वसंत ऋतु में आयुर्वेद ने खान-पान में संयम की बात कही है।

 वसंत ऋतु दरअसल शीत और ग्रीष्म का संधिकाल होती है। संधि का समय होने से वसंत ऋतु में थोड़ा-थोड़ा असर दोनों ऋतुओं का होता है। प्रकृति ने यह व्यवस्था इसलिए की है क्योंकि प्राणीजगत शीतकाल को छोड़ने और वसंत ऋतु में कफ  की समस्या अधिक रहती है। अतः इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूं, चावल, मूंग,  अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियां, केला, खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी, आंवला आदि कफ नाशक पदार्थों का सेवन करें।  इसके अलावा मूंग बनाकर खाना भी उत्तम है। नागरमोथ अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ  का नाश होता है। मन को प्रसन्न करें एवं जो हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। 

इस ऋतु में कड़वे नीम में नई कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें, 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए। 15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्ष भर चर्म रोग, रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है। 

धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत बिना नमक के व्रत करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप, हाई बीपी, गुर्दा, किडनी आदि के रोग नहीं होते। वसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि वसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही  कफ  को बढ़ाता है।  शीत एवं वसंत ऋतु में श्वास, जुकाम, खांसी आदि जैसे कफजन्य रोग उत्पन्न होते हैं। उन रोगों में हल्दी का प्रयोग उत्तम होता है। हल्दी शरीर की व्याधि रोधक क्षमता को बढ़ाती है, जिससे शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। मौसम के अनुसार भोजन हमारे  शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी होता है। मौसम के अनुसार भोजन में परिवर्तन करके आहार लेने वाले लोग सर्वथा स्वस्थ और प्रसन्नचित रहते हैं। उन्हें बीमार होने का भय नहीं रहता।

#क्या न करें?

वसंत में खट्टा, बहुत ज्यादा नमकीन या तैलीय भोजन भी नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से कफ दोष बढ़ सकता है. -इस मौसम में उड़द दाल का सेवन नहीं करना चाहिए. – इस मौसम में पूड़ी-कचौड़ी जैसे हैवी फूड से भी बचना चाहिए.

अधिक मात्रा में जौ, दलिया और ओट्स जैसे आनजों का सेवन करने से बचें। रेफ्रिजरेटर में जमी हुईं और ठंडी खाने वाली चीज़ों को भी भोजन में शामिल न करें।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2024

क्यों फूलती है और उपचार|How To To Treat|10 Bसांसest Way–Home Remedies


  क्यों फूलती है और उपचार|How To To Treat|10 Bसांसest Way–Home Remedies

#Dr.VirenderMadhan 

सांस फूलने की बीमारी कई कारणों से हो सकती है जिसमें :–

- एनीमिया,

- अस्थमा या

- क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज जैसी स्थितियां हो सकती हैं। 

सांस फूलने की बीमारी – 


–संक्रमण,

–सूजन,

– एलर्जी,

– डायबिटीज,

– दमा की बीमारी,

– और प्रदूषण जैसे कई कारणों की वजह से भी हो सकती है।


#सांस फूलना कौन सी बीमारी के लक्षण है?

सांस की पुरानी और तीव्र कमी का कारण बनने वाली स्थितियों में शामिल हैं:

– दमा अस्थमा के कारण संकीर्ण वायुमार्ग सांस लेने में मुश्किल कर सकता है।

– हृदय का रुक जाना यह तब होता है जब रक्त हृदय को ठीक से भर नहीं पाता है और निकल नहीं पाता है। 

– फेफड़ों की बीमारी मे सांस फुलने लगती है

 – मोटापा ...

– चिंता ...

– फुफ्फुसीय अंतःशल्यता

** सांस फूलने की समस्या को हर बार फेफड़े और हृदय की दिक्कतों से जोड़कर देखना सही नहीं है। 

– कई लोगों में किडनी और मांसपेशियों से संबंधित समस्याओं के कारण भी सांस की दिक्कत हो सकती है।

– थोड़ा सा भी चलने-फिरने या फिर कोई काम करने पर सांस फूल जाती है तो यह विटामिन बी12 की कमी के लक्षणों में आता है. ऐसा रेड ब्लड सेल्स की कमी से ही होता है.


#कमजोरी से सांस फूलती है क्या?

– आयरन की कमीका सबसे आम लक्षण एनीमिया कहलाता है. इसकी वजह से थकान, चक्कर आना, सांस फूलना, स्किन का पीला पड़ना, भूख-प्यास न लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

– विटामिन डी की कमी का प्रचलन बढ़ रहा है और इसे अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज सहित प्रतिरोधी फेफड़ों की बीमारियों से जोड़ा गया है।

#पेट में गैस बनने से सांस फूलती है क्या?

– पेट की गैस से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है.

#सांस फूलना और घबराहट होना:-

यदि रक्त में बड़ी मात्रा में अम्ल जमा होता है (जिसे मेटाबोलिक एसि weडोसिस कहा जाता है), तो लोगों की सांस फूलने लगती है और वे तेज़ी से हांफने लगते हैं।

– किडनी का गंभीर रूप से खराब होना, 

– डायबिटीज मैलिटस का अचानक बिगड़ जाना, और कुछ दवाओं या विष को निगल लेने से मैटाबोलिक एसिडोसिस हो सकता है।

#सांस लेने में भारीपन क्यों होता है?

– सांस फूलने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :- कि सर्दी-ज़ुकाम, खांसी, भूख से अधिक खाना, मोटापा, कम दबाव वाला यानी ऊंचाई वाला स्थान, अधिक गर्म या अधिक ठंडा माहौल, फेफड़ों में छोटी-मोटी परेशानी, सांस नली का जाम होना, प्रदूषण आदि।


#सांस फूल रही हो तो क्या करना चाहिए?

सांस फूलने पर क्या करें?

– मुंह खोलकर गहरी सांस छोड़ें- अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है या सांस फूल रही है तो तुरंत राहत पाने के लिए नाक से गहरी गहरी सांस लें और होठों से सीटी बजाते हुए सांस बाहर छोड़ें। ऐसा करने से आपको तुरंत आराम मिलेगा।


#सांस फूलने की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

रोफ्लेयर टैबलेट 

Asthalin


इससे आपको छाती में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट और खांसी जैसे लक्षणों से राहत मिलेगी और आपको अपने रोजमर्रा के कामों को आसानी से करने में मदद मिलेगी. यह दवा सुरक्षित और प्रभावी है.



#सांस की देसी दवाई कौन सी है?

– अदरक से सांस की परेशानी करें कम

इसका इस्तेमाल आप सूप, स्मूदी, काढ़ा इत्यादि के रूप में कर सकते हैं। 

– अदरक के रस को आप आंवला और एलोवेरा के साथ खा सकते हैं। यह आपकी इम्यून पावर को बूस्ट कर सकता है। साथ ही बलगम को तोड़ने में मदद करता है, फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार करता है।

#सांस फूलने में कौन सा फल खाना चाहिए?

जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है, उन्हें अपनी डाइट में – ब्रोकली, जामुन, केला, पत्तेदार साग, खरबूजे, और एवोकाडो को जरूर शामिल करना चाहिए। ये फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार कर सकते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए मैग्नीशियम काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह फेफड़ों को स्वस्थ रखने में काफी मददगार है।


#दमा को जड़ से खत्म कैसे करें?

#अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

*हर्बल टी:–

 अस्थमा के असर को कम करने के लिए आप रोजाना अलग-अलग जड़ी बूटियों से बनी हुई हर्बल टी का सेवन कर सकते हैं। 

*लहसुन:–

 लहसुन भी अस्थमा के इलाज में काफी कारगर साबित हुआ है। 

*अजवाइन का प्रयोग अपने भोजन में अवश्य करें

*आंवला पाउडर 1-1 चम्मच सवेरे शाम पानी से करें

*पीपल के 2 पत्ते काटकर ढेड कफ पानी मे उबालकर चाय की तरह बनाकर पीने से आराम मिलता है

*अडूसा की पत्तियां भी चाय की तरह पकाकर उसमें सौठ,काली मिर्च, छोटी पीपल डालकर पीने से बहुत लाभ मिलता है

*अंजीर खाने से फेफड़ों को बल मिलता है

*हल्दी आधा चम्मच रोज खाने से सांस फुलने मे फायदा करता है.

#सांस फूलती है तो क्या खाना चाहिए?

– अस्थमा रोगियों के लिए डाइट टिप्स | Diet Tips For Asthma Patients:-

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– लहसुन और प्याज का सेवन रोज करे.

– मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स खाएं 

– भोजन में अलसी शामिल करें ,इसे भूनकर 1-चम्मच रोज खाना चाहिए

– विटामिन डी से भरपूर फूड्स खाएं 

क्या न करें:-

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–डेयरी का सेवन कम से कम रखें

– स्मोकिंग (बीड़ी, सिगरेट या इस तरह का नशा करना),न करें  

 – बहुत ज़्यादा वायु प्रदूषण से बचना चाहिए

– 5,000 फ़ुट से ज़्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में नही जाना चाहिए,

 – वज़न कम करने और कसरत करते रहने से भी आराम मिलता है

#चिकित्सीय देखभाल लेना

डॉक्टर से तुरंत मिलें यदि आपको–

अचानक और गंभीर लक्षण दिखाई दें

* आराम करते समय सांस लेने में परेशानी हो

* सीने में दर्द, ठंड में पसीना छूटना, बेहोशी, या मतली हो

होंठ या उंगलियां नीली हो जाएं

काम न कर पाएं या दैनिक कार्यों को पूरा न कर पाएं

डॉक्टर को दिखाएं, 

**अगर आपके टखनों और पैरों में सूजन हो

– सांस लेने में तकलीफ़ हो

– बुखार और खांसी हो

– सीधे लेटने पर लक्षण और बिगड़ जाएं

#फेफड़ों के लिए सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?

फेफड़ों के रोग के लिए सर्वोत्तम आयुर्वेदिक औषधि स्वर्णभ्रकसिंदूर है।

स्वर्णभ्रकसिंदूर अस्थमा, खांसी, सीने में कंपन के इलाज में मदद करता है और टीबी के रोगी को भी इसकी सलाह दी जाती है।

#आयुर्वेद में फेफड़ों से बलगम कैसे निकालते हैं?

– तुलसी की पत्तियों को कच्चा खाया जा सकता है और यह खांसी से बलगम को साफ करने में मदद करती है ।

– तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए तुलसी की कुछ पत्तियों के साथ थोड़ा पानी उबालें। चार काली मिर्च और एक चम्मच कसा हुआ अदरक डालें। थोड़ा सा नमक डालें और उबाल लें।


शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक औषधियाँ:–

श्वास कुठार रस

श्वासभैरव रस

श्वासचिन्तामणी रस

सूर्यावर्त रस

वृहतमृगांक वटी

नागार्जुनाभ्र रस

महाश्वासारि लौह, पिपल्यादि लौह, गुडादि गुटिका,  व्योषादि गुटिका,  कण्टकारि अवलेह, मल्ल सिन्दूर, ताम्र सिन्दूर, कनकासव, तालीसादि चूर्ण आदि

इन सभी औषधियों का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर करें.