Guru Ayurveda

गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

बरगद के पत्ते फल दूध और जड को कैसे और कब प्रयोग करें?In hindi.


 #बरगद के पत्ते फल दूध और जड को कैसे और कब प्रयोग करें?In hindi.

How and when to use banyan leaves, fruit, milk and root? In hindi.

 #Banyan tree|बरगद का पेड़| 

बरगद के पेड़ के सभी भागों (जड़, तना, पत्तियां, फल और छाल) को औषधीय उपयोग में लाया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट (सूजन घटाने वाला) और एंटी-माइक्रोबियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) प्रभाव के कारण इसे दांतों में सड़न और मसूड़ों में सूजन की समस्या को कम करने में सहायक माना गया है 

#बरगद के फल(fruit of Banyan tree) :-

बरगद के फल के पोषक तत्व

होते है भरपूर मात्रा में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी1, विटामिन बी3 होता है।

फल को 1 या 2 ग्राम की मात्रा में, सूर्योदय के समय गाय के दूध के साथ सेवन करने से बार-बार पेशाब आने की समस्‍या दूर हो जाती है. इम्‍यूनिटी कम होने में बरगद के फल इम्‍यूनिटी बढा़ने में बहुत उपयोगी होते है। बरगद के फलों में एंटीएंटीऑक्सिडेंट , एनाल्जेसिक, गुण होते हैं,  

– बरगद के फलों में कार्बोहाइड्रेट, शुगर, फाइबर, प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन, ओमेगा 3-6 और कैल्शियम व फास्फोरस भी प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जैसे प्राकृतिक खनिज भी होते हैं, और पॉलीफेनॉल जो रक्तचाप को कम करने और कोरोनरी हृदय रोग को रोकने के लिए उपयोगी होता है। 

- बरगद के पेड़ के फल का सेवन करने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो जाता है।

#बरगद का दूध(Milk of Banyan tree) :-

* बरगद का दूध बताशे में डालकर खाने से क्या होता है?

–बरगद का दूध ठंडा होता है। यह शरीर से अनावश्यक गर्मी को निकालता है। इसका दूध शरीर में वात, पित्त और कफ तीनों ही दोषों को नष्ट करता है। 

– यह धातुबर्द्धक होता है तथा नपुंसकता जैसी समस्या को दूर करता है।

#बरगद के पत्ते;-

इसकी पत्तियों में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। बरगद में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल करने में फायदेमंद होता है।

#बरगद की जड़:-

बरगद की जड़ से क्या होता है?

-इसकी जड़ धारण करने से ना केवल मानसिक शांति और विचारों की शुद्धता प्राप्त होती है बल्कि दिमाग फोकस्ड भी होता है। अनेक बीमारियों में भी इसकी जड़ लाभकारी होती है। इसकी जड़ को यदि दूध के साथ घीसकर महिला को पिलाई जाए तो नि:संतानता की समस्या दूर होती है।

#बरगद के पेड़ के फायदे – Benefits of Banyan Tree in Hindi

बरगद के पत्ते, फलों का चूर्ण प्रयोग करने से–

-दांत और मसूड़ों स्वस्थ रहते है।

-प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।

- बवासीर में भी आराम मिलता है।

-डायबिटीज को दूर करने में सहायक है।

- डिप्रेशन को कम करता है।

-डायरिया में राहत मिलती है।

- बांझपन और नपुंसकता में अतिलाभदायक है।

सरगद को इसीलिए पुज्य वृक्ष माना है।

धन्यवाद!

डा०वीरेंद्र मढान.

मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

हाइड्रोसील क्या है?कारण और ईलाज क्या है ? In hindi.

 अण्डकोष बृद्धि|हाइड्रोसील

हाइड्रोसील क्या है?कारण और ईलाज क्या है ? In hindi.



What is hydrocele? What is the cause and treatment?  In hindi.

- यह समस्या पुरुषों के एक अंडकोष में या फिर दोनों अंडकोषों में भी हो सकती है.  - जब किसी कारणों से अंडकोष में अधिक पानी जमा हो जाता है. इसके कारण अंडकोष की थैली फूल जाती है। इसे हाइड्रोसील या प्रोसेसस वजायनेलिस भी कहते हैं.

- अंडकोष वृद्धि(Hydrocele) स्क्रोटम में सूजन का एक प्रकार होता है, हाइड्रोसील नवजात शिशुओं में आम है, यह बिना उपचार के गायब हो जाता है|

- वयस्क पुरुष स्क्रोटम के भीतर सूजन या चोट के कारण अण्डकोष वृद्धि विकसित कर सकते हैं| एक अण्डकोष वृद्धि आमतौर पर दर्दनाक या हानिकारक नहीं होता है, और किसी भी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है| लेकिन अगर आपके पास सूजन है, तो चिकित्सक से परामर्श जरुर करें|

#Symptoms of Hydrocele

- अंडकोष की नसों में सूजन होने पर यह लक्षण नजर आते है। 

- अंडकोष में दर्द जो अचानक से तीव्र या कम हो सकता है

- कड़ी एक्सरसाइज या लम्बे समय तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ जाता है।

- पीठ के बल लेटने से दर्द कम होता है

#अण्डकोष बृद्धि के आयुर्वेदिक 4 दिव्य उपचार:-

1– छोटी कटेरी की ताजा जड 20ग्राम.

- कालीमिर्च के 7 दाने 

दोनो को पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर 7 दिनों तक सवेरे प्रातःकाल पिला दें।

अण्डकोष सम्बंधित सब रोग दूर हो जाते है।

भोजन मे बेसन की रोटी के साथ धी खायें और कुछ न खायें।

2– वायविंडग, कुंदरू, पुरानी ईंट तीनो 5-5 ग्राम लेकर चूर्ण करके 35 ग्राम धी के साथ खायें ।यदि पहले दिन वमन हो तो अण्डकोष अपनी पहली दिशा पर आ जाए।

3– कटकरज्जा के तीन दाने को भुभल मे भुनकर खिलाने से  7 दिनों में अण्डकोष बृद्धि ठीक हो सकती है।

4– हींग, सेंधानमक, जीरा,– तीनों बराबर लेकर चार गुणा सरसौ का तैल मे पकाकर लेप करने से अण्डकोषबृद्धि दूर होती है। इस के अलावा सभी प्रकार के दर्द, मोच,चोट आदि के विकार दूर होते है।

धन्यवाद!

डा०वीरेंद्र मढान।

शनिवार, 3 दिसंबर 2022

जीरा Cumin seed किसे कहते हैं?In hindi.

 जीरा Cumin seed किसे कहते हैं?In hindi.

जीरा–



जीरे को Cuminum cyminum कहते है इसे जीरक ,जरण,अजाजी, दीर्धजीरक,जीरा, सफेद जीरा, आदि नामों से जानते है।

 यह कई मसाले मिश्रणों (जैसे गरम मसाला) का एक अनिवार्य हिस्सा है, या तो साबुत या पीसा हुआ। पहले बीजों को भूनने से उनकी तेज सुगंधित सुगंध बढ़ेगी।

 यह पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर भारत तक के क्षेत्र का देशज है। इसके प्रत्येक फल में स्थित एक बीज वाले बीजों को सुखाकर बहुत से खानपान व्यंजनों में साबुत या पिसा हुआ मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह दिखने में सौंफ की तरह होता है।

#जीरा क्या काम करता है?

जीरे के आयुर्वेदिक गुण:-

गुण– लघु , रूक्ष है

रस:- कटु 

विपाक :- कटु

वीर्य:- उष्ण

कर्म-जीरे के कार्य:-

दोषकर्म – 

यह उष्ण होने से कफ वात शामक और पित्त बर्द्धक है।इसलिए इसका प्रयोग    कफवात रोगो मे करते है।

संस्थान अनुसार कर्म

बाह्य:- 

इसका लेप करने से लेखन, शोथहर,और वेदना स्थापन गुण है।इसका प्रयोग वर्णविकार,कंडू,पामा,आदि त्वचा रोगों में करते है।तथा बिच्छू विष मे लेप करते है।

जीरे का आन्तरिक प्रयोग–

पाचनतंत्र पर–

यह रोचक,दीपक, पाचन, वातानुलोमन,शूलप्रशमन,ग्राहीऔर कृमिनाशक है।

यह अरूचि, वमन,अग्निमांद्य,अजीर्ण,आध्मान,ग्रहणी,अर्श एवं कृमिरोगो मे प्रयोग करते है।

रक्तवह संस्थान पर–

यह उत्तेजक और रक्तशोधक है। इसका प्रयोग हृदयरोग ,रक्तविकार मे किया जाता है।

मूत्रवहसंस्थान पर –

 यह मूत्रल है। इसे मूत्रघात,पूयमेह, तथा अश्मरी (पथरी) मिश्री के साथ देते है।

प्रजननसंस्थान पर–

 यह गर्भाशय के शोथ को दूर करता है तथा स्तन्यजनन है यानी दुध बढाता है तथा इसका प्रयोग श्वेतप्रदर मे करते है।

* यह कटुपौष्टिक के रूप मे काम करता है क्रमशः बल बढाता है।

जीरे के योग:- 

जीरकादि मोदक,जीरक चूर्ण, जीरकादि तैल,और जीरकारिष्ट।

धन्यवाद!

डा०वीरेंद्र मढान.

रविवार, 27 नवंबर 2022

पाइल्स (बवासीर) क्या है?In hindi. What is piles (hemorrhoids)?


 #पाइल्स (बवासीर) क्या है?In hindi.

What is piles (hemorrhoids)?

#बवासीर

 बवासीरके नाम:-

अर्श,पाईल्स,बवासीर या हीमोरॉइड्स:-

――――――――――――

मलाशय और गुदा नलिका की दीवारों के अंदर मौजूद रक्त वाहिकाएं होती हैं। बवासीर तब होता है जब इन रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है, जिसके कारण मस्से बन जाते है। जिनमें मल त्यागने के समय और भी ज़्यादा तनाव आता है, जिससे दर्द और परेशानी होती है।

#बवासीर होने के कारण क्याहै? 

What is the cause of piles?

>>बार बार बवासीर क्यों होती है?कारण क्या हैं?

 - कब्ज पाइल्स की सबसे बड़ी वजह होती है। कब्ज होने की वजह से कई बार मल त्याग करते समय जोर लगाना पड़ता है और इसकी वजह से बवासीर की शिकायत हो जाती है।

 - जिन्हें ज्यादा देर तक खड़े रहने का होता है, उन्हें पाइल्स की समस्या हो सकती है। - गुदा मैथुन करने से भी पाइल्स की समस्या हो सकती है।

#बवासीर के लक्षण क्या होते है?

What are the symptoms of piles?

– मलत्याग करते समय खून आना।

– खुजली होना।

– मलाशय में दर्द करनेवाली गांठ होना।

–गुदा में सूजन हो जाना।

–मलत्याग करते समय खून आना।

#बवासीर ठीक करने का सबसे फास्ट तरीका क्या है?

What is the fastest way to cure piles?

सेव का सिरक (एपल साइडर वेनेगर) की मदद से आप पाइल्स का इलाज कर सकते हैं. एपल साइडर वेनेगर में इंफेक्शन को नहीं बढ़ने देने का गुण पाया जाता है. इसके प्रयोग से रेक्टल एरिया में इंफेक्शन नहीं बढता है और ये दर्द कम करने में भी मदद करता है. इसके अलावा इसके इस्तेमाल से जलन में भी राहत मिलती है

#बवासीर की बीमारी को जड़ से खत्म कैसे करें?

देसी घी अपने गुणों के लिए जाना जाता है. अगर आप नियमित रूप से देसी घी का सेवन करते हैं तो कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. बवासीर की समस्या से निजात पाने के लिए देसी घी में चुटकीभर हल्दी मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें और बवासीर वाली जगह पर नियमित तौर पर लगाने से कुछ ही दिनों में बवासीर की समस्या ठीक हो जाती है.

― बवासीर को ठीक करने के लिए क्या खाएं?

दूध और नींबू

दूध और नींबू पाइल्स की समस्या को ठीक करने के लिए बहुत उपयोगी है। यह खूनी बवासीर को भी 3 दिनों के अंदर ठीक कर देता है। इसके लिए सुबह खाली पेट एक कप ठंडे दूध में आधा नींबू निचोड़ कर तुंरत पी जाए। 

#क्या गर्म पानी पीने से बवासीर होता है?

Does drinking hot water cause piles?

गुनगुना पानी पीना–

गुनगुना पानी पीना, बवासीर का उपचार करने में सहायक होगा। कब्ज न होने के कारण आपको मलत्याग में आसानी होगी और दर्द नहीं होगा, फलस्वरूप बवासीर को ठीक होने में मदद मिलेगी। एक गिलास पानी गर्म करें और गुनगुना होने पर इसे सादा ही पी लें।

#क्या खाने से बवासीर ठीक हो जाएगा?

– बवासीर में क्या खाना चाहिए?


बवासीर होने पर अपने आहार में साबुत अनाज- जैसे ब्राउन राइस, ओट्स, होल व्हीट एड करें। 

 साबुत अनाज में फाइबर बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इनके सेवन से मल नरम हो जाता है और मल त्याग के दौरान होने वाले दर्द में कमी आती है।

#बवासीर में मदद करने के लिए मैं क्या पी सकता हूं?

बवासीर में छाछ लेने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।

फाइबर में उच्च खाद्य पदार्थ खाने से मल नरम और आसान हो सकता है और बवासीर के इलाज और रोकथाम में मदद मिल सकती है। पीने का पानी और अन्य तरल पदार्थ, जैसे फलों के रस और साफ सूप , 

#बवासीर में क्या नहीं करना चाहिए?

– बवासीर है तो उन खाद्य पदार्थों से बचें जो वसायुक्त या फाइबर में कम हैं.

–बवासीर पर मत उठाओ; भारी वस्तुओं को उठाने से बचें; – तनाव और चिंता से बचें; और

 –जुलाब के अति प्रयोग से बचें 

#बवासीर कब तक रहता है?

बवासीर कितने समय तक रहता है यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होगा। सामान्य तौर पर, छोटे बवासीर कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो सकते हैं । बड़े बवासीर, जो बहुत अधिक दर्द, सूजन और खुजली का कारण बनते हैं, अपने आप दूर नहीं जा सकते हैं और उन्हें ठीक करने के लिए चिकित्सक से उपचार की आवश्यकता होती है।

धन्यवाद!

Dr.Virender Madhan.

शनिवार, 26 नवंबर 2022

अमरूद का फल और पत्ते खाने से क्या लाभ होता है?In hindi.

 अमरूद का फल और पत्ते खाने से क्या लाभ होता है?In hindi.



What is the benefit of eating guava fruit and leaves?

अमरुद खाने से क्या होता है?

what happens by eating guava?

अमरुद|guava.

Dr.Virender Madhan.

–वजन कम करने में फायदेमंद अमरूद वजन को नियंत्रण में रखने में मददगार है। 

–अमरुद खाने से कब्ज की समस्या दूर होती है।

–अमरुद से पाचन क्रिया में सुधार आता है। 

–बवासीर में अमरुद लेने से लाभ मिलता है।।

–पेट की जलन शांत होती है।

#1 दिन में कितना अमरूद खाना चाहिए?



How much guava should be eaten in 1 day?

एक दि‍न में क‍ितने अमरूद खा सकते हैं? 

– एक द‍िन में एक या दो से ज्‍यादा अमरूद का सेवन न करें। ज्यादा अमरूद खा लेने से पेट में सूजन या गैस की समस्या हो जाती है। 

#अमरूद खाने के बाद क्या नहीं खाना चाहिए?

अमरूद खाने के बाद दूध, पानी और दूध से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए. अमरूद सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद फल होता है इसको खाने से स्वास्थ्य की बहुत सी समस्याएं से आराम मिलता है.

#अमरूद में कौन कौन से विटामिन पाए जाते हैं?



अमरुद मे विटामिन "सी' अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त विटामिन "ए' तथा "बी' भी पाए जाते हैं। इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं।

#अमरूद किसे नहीं खाना चाहिए?

Who should not eat guava?

अगर आपको मधुमेह है और अमरूद का सेवन करें तो अपने ब्लड शुगर की सावधानीपूर्वक जांच करें। 

*सर्जरी: 

अमरूद रक्त शर्करा को कम कर सकता है। सिद्धांत रूप में, अमरूद रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकता है या सर्जिकल प्रक्रियाओं के दौरान और बाद में रक्त शर्करा नियंत्रण में हस्तक्षेप कर सकता है। सर्जरी से पहले अमरूद को  इस्तेमाल करना बंद कर दें ।

#अमरूद की तासीर क्या होती है?

–अमरूद की तासीर ठंडी होती है. 

–पेट की बहुत सी बीमारियों को दूर करने का रामबाण इलाज है. अमरूद के सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है. इसके बीजों का सेवन करना भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है.

अमरूद के बीज गैस और अपच की समस्या को दूर करने में मदद करता हैं। दिल को सेहतमंद रखने में अमरूद बेहद असरदार है। अमरूद में एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो दिल की सेहत को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। अमरूद में मौजूद फाइबर कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है।

#अमरूद की पत्तियों के लाभ:-

Benefits of guava leaves:-

अमरूद की पत्तियों में भी एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो कई बीमारियों से बचाते हैं.

अमरुद के पत्ते कोलेस्ट्रोल को करता है।

–अमरूद की पत्तियां को बालों के लिए भी प्रयोग मे लाया जा ता है. 

इसके लिए अमरूद की पत्तियों को पानी में डालकर उबाल लें और इस पानी को ठंडा करने के बाद बालों की जड़ों में अच्छी तरह लगाएं. इसके कुछ समय बाद बालों को धो लें.

–शुगर को नियंत्रित करता है 

– मुंह में छालों के लिऐ अमरूद की पत्तियों को तोड़कर चबाएं. इससे आपको राहत मिलेगी.

–अमरूद की पत्तियों का उपयोग पिंपल्स को खत्म करने के लिए भी करते हैं। अमरुद के पत्ते पीसकर पेस्ट बना लें और सोने से पहले रात में फेस पर लगाकर सोएं. फिर सुबह इसे धो लें.

–अमरूद की पत्तियों में मौजूद फेनोलिक योग रक्तशर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. 

–अमरूद के पत्तों के सेवन से लिपिड में भी कमी आती है. 

–अमरूद की पत्तियों डेंगू में भी फायदेमंद माने जाते हैं. यह खून में प्लेटलेट्स को बढ़ाने का काम करता है और रक्तस्त्राव से आपको बचाता है.

धन्यवाद!

मंगलवार, 22 नवंबर 2022

कांचनार–(Bauhinia Variegats)का परिचय और उपयोग।हिंदी में.

 #गांठों का ईलाज#घरेलू औषधि #मेद नाशक 

कांचनार–(Bauhinia Variegats)का परिचय और उपयोग।हिंदी में.



By Dr.VirenderMadhan.

नाम–कांचनार, गण्डारि,शोणपुष्पक ये श्वेत कांचनार के नाम है।

रक्त कांचनार के नाम :- कोविदार, चमरिक,कद्दाल,कुंडली,ताम्रपुष्प,

कांचनार के गुण:-

शीतल,ग्राही, कषैला और कफ-पित,कृमि, कोढ,गुदभ्रंश,गण्डमाला, और व्रण को नष्ट कर ने वाला है।

गुण;-रूक्ष,लघु,

रस;-कषाय,

विपाक;- कटु,

वीर्य;-शीत,

प्रभाव;-गण्डमाला नाशक,गांठ नाशक,

बाह्य प्रयोग:-

यह व्रणशोधन,व्रणरोपण,कुष्ठध्न, शोथहर है।

आभ्यंतर:-

यह कफ-पितज रोगों मे प्रयोग होता है।गण्डमाला या गांठों पर लेप करने के काम आता है।

पाचनतंत्र–

यह कषाय होने से स्तम्भन और कृमिनाशक है यदि बडी मात्रा मे लें तो यह वामक (उल्टी कराने वाला है)

यह अतिसार, प्रवाहिका, गुदभ्रंश मे काम आता है।

इसका प्रयोग कृमिनाशक के रूप मे करते है तथा इसक फुलों के गुलकन्द बनाकर विबन्ध(कब्ज) मे उपयोग करते है।

गुदभ्रंश मे इसके क्वाथ से धोते है।

रक्तवह संस्थान:-

रक्तस्तम्थन है ।इसका प्रयोग रक्तपित्त मे करते है। विषेशकर लसिका ग्रन्थियों पर कार्य करता है।।सुजन को दूर करता है।



श्वसनसंस्थान :-

यह कासहर(खाँसी)है

मूत्रवहसंस्थान;-

यह मूत्र संग्रहणीय है यानि मूत्रसंग्रह करता है।इस लिऐ इसका प्रयोग प्रमेह रोगों में करते है।

प्रजननसंस्थान;-

यह आर्तवस्राव को कम करता है।इसलिए इसे रक्तप्रदर मे देते है।

त्वचा;-

यह कुष्ठध्न है।

कांचनार रूक्ष होने से  लेखन कार्य करता है।शरीर की मेद को कम करने मे सहायक होता है।

औषधार्थ अंग:- 



–मूलत्वक,पत्र,पुष्प,का प्रयोग होता है।

मात्रा:-

मूलत्वक 1 से 4 ग्राम, पुष्प;2-6 ग्राम,

कांचनार का क्वाथ ;- 20-30 मि०ली०

रविवार, 20 नवंबर 2022

#हरड किसे कहते है कैसे और कब प्रयोग करें?In hindi.

 #हरीतकी-हरड #हरड _एक_अमृत #रसायन

#हरड किसे कहते है कैसे और कब प्रयोग करें?In hindi.

हरड;-



हरीतिकी, पथ्या, विजया,शिवा,अभया आदि नाम से जानी जाती है।

ऋषि वांग्भट्ट ने अष्टांग संग्रह में बताया है कि

- सब रोगों का हरण करने वाली जडी को हरीतकी करते है।सब धातुओ के लिऐ पथ्य होने से “पथ्या" कहते है।

- जो सम्पूर्ण रोगों पर विजय पा जाती है उसे “विजया" कहते हैं।

- सबके लिऐ कल्याण कारक है इस लिए हरड को “शिवा” नाम दिया है।

- सभी रोगो से अभय करने वाली होने से “अभया” कहलाती है।

इसके लगातार सेवन करने से स्थिर होती है इसलिए भी यह अभया है।

उत्तम हरड के लक्षण:-

–––––––––––

जो नई,गोल,मोटी, चिकनी हो,भारी, पानी में डुबती हो,वह उत्तम है।

#हरड का अनुपान प्रयोग?

बालक को हरड मक्खन के साथ देनी चाहिए।

- वायु रोग मे धी व लवण के साथ;

- पित्तज रोगों में गुड और शर्करा के साथ;

- कफज रोगों में पिपली व मधु के साथ देनी चाहिए।


हिमालय पर्वत पर समय से उत्पन्न,रस-वीर्य से पुर्ण, रोगरहित हरडों को लेकर दो या तीन टुकड़े करके गुठली निकाल देवे फिर हरडों को 4 गुणा दूध मे पकावें। जब हरड नर्म हो जाये तब उतार कर ठंडा कर लेवे।इनमें धी एक आढक मधु एक आढक मिलाकर सुरक्षित रख लेवे।

तीन दिन के बाद इनका प्रयोग करना शुरु कर दें .हरड इतना ही ले जिससे भुख न रूक जाये।यह प्रति दिन खाये जब तक हरड खायें तब तक भात दूध ही लेवे।

इसके सेवन से बुढापे रहीत,झुर्रियां, गंज, श्वेत बाल,रोगरहित हो कर सौ साल की आयु प्राप्त करता है; श्रुति(श्रवण शक्ति)और स्मृति बनी रहती है ;अग्नि भी बनी रहती है।

इस प्रयोग के खाने से पुरुष का शरीर वृहत पर्वत के समान दृड  हो जाता है।

[पुरूष के रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र सत्व, आठ सार पुष्ट हो जाते है।स्वर बादलों की तरह गडगडाहट के समान गम्भीर हो जाता है।संतान दृड व प्रभुत होती है।

हरीतकी के शास्त्रीय योग;

ब्राह्मरसायन

हरीतिकी रसायन


#हरड़ कब खानी चाहिए?

खाना खाने के पहले इसके चूर्ण का सेवन करने से भूख खुल कर लगती है। 

- सौंठ, गुड़ या सेंधा नमक के साथ खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

 -हिचकी में हरड़ पाउडर व अंजीर के पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लें, लाभ होगा। -हरड़ के दो या तीन मुरब्बे का सेवन करने से सुबह कब्ज की शिकायत नहीं रहती।

#हरड़ खाने से क्या लाभ होता है?

प्रतिदिन हरड़ का सेवन आपके पाचन तंत्र ठीक हो जाता है। इसे गैस, अपच और कब्ज जैसी पेट की कई समस्याओं में लाभदायक माना गया है। एक कप गर्म पानी में 2-3 ग्राम हरड़ का सेवन आपको पाचन संबंधी परेशानियों में आराम दिलाता  है। 

- हरड़ का सेवन उल्टी में भी राहत दिला सकता है।


#हरड़ की तासीर क्या होती है?

– हरड़ की तासीर गर्म होती है। इसलिए बहुत अधिक तेज गर्मी के मौसम यानी मई और जून में बिना चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन ना करें। यदि आपको खून से संबंधित कोई बीमारी है, शरीर में सूखापन है तब भी बिना चिकित्सक की सलाह के इसे ना लें। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।



#छोटी हरड़ और बड़ी हरड़ में क्या अंतर है?

1 एक हरड आकार मे छोटी तथा एक बडी व पीले रंंग की होती है।

2 पीली हरड़:- बड़ी हरड़ पीले रंग की, डेढ़ इंच लंबी तथा आधा इंच चौड़ी होती है तथा इस पर पांच रेखाएं होती हैं। 

3. छोटी हरड़:- छोटी हरड़ बिना पका फल होती है। छोटी हरड़ के लिए फल में गुठली बनने से पहले तोड़ लिया जाता है और उसे मिट्टी से ढक दिया जाता है।

Dr.Virender Madhan.