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मंगलवार, 1 सितंबर 2026

60 साल के बाद कमजोरी आना जरूरी नहीं | 60+ में ताकत और स्फूर्ति कैसे बनाए रखें? In hindi


 

60 साल के बाद कमजोरी आना जरूरी नहीं | 60+ में ताकत और स्फूर्ति कैसे बनाए रखें? In hindi 

60 साल के बाद कमजोरी आना जरूरी नहीं है। जानिए 60+ उम्र में ताकत, ऊर्जा और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए खान-पान, व्यायाम, नींद और स्वस्थ जीवनशैली के आसान उपाय।

60 साल के बाद कमजोरी

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60 साल के बाद कमजोरी आना जरूरी नहीं

क्या 60 साल की उम्र के बाद कमजोरी, थकान और शरीर में ऊर्जा की कमी होना जरूरी है? नहीं।

उम्र बढ़ना प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन हर व्यक्ति का कमजोर होना जरूरी नहीं है। अगर 60 साल के बाद भी खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद और मानसिक स्वास्थ्य का सही ध्यान रखा जाए तो व्यक्ति लंबे समय तक सक्रिय और आत्मनिर्भर रह सकता है।

60 साल के बाद कमजोरी क्यों महसूस हो सकती है?

उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है। इसके अलावा भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी, नींद की समस्या, पानी की कमी तथा कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी कमजोरी का कारण बन सकती हैं।

इसलिए कमजोरी को हमेशा केवल उम्र का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

60+ उम्र में ताकत बनाए रखने के 7 आसान उपाय

1. भोजन में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें

दाल, चना, मूंग, पनीर, दही, दूध, सोयाबीन और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपनी जरूरत के अनुसार भोजन में शामिल करें।

2. रोज पैदल चलें

अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलना शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।

3. मांसपेशियों की ताकत पर ध्यान दें

उम्र के अनुसार हल्के स्ट्रेंथ एक्सरसाइज, जैसे चिकित्सक या प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा बताए गए व्यायाम, मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं।

4. पर्याप्त नींद लें

शरीर की रिकवरी और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित और पर्याप्त नींद महत्वपूर्ण है।

5. पानी पर्याप्त मात्रा में लें

प्यास कम लगने पर भी उम्रदराज लोगों को पर्याप्त तरल पदार्थ लेने का ध्यान रखना चाहिए, बशर्ते किसी बीमारी के कारण डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित न किया हो।

6. तनाव कम करें

तनाव और अकेलापन भी व्यक्ति को थका हुआ महसूस करा सकते हैं। परिवार और मित्रों के संपर्क में रहें, अपनी पसंद के काम करें और मानसिक रूप से सक्रिय रहें।

7. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

अगर कमजोरी लगातार बनी रहती है या अचानक बढ़ गई है तो डॉक्टर से जांच करवाएं। कभी-कभी एनीमिया, मधुमेह, थायरॉयड या पोषण संबंधी कमी जैसी समस्याएं भी कमजोरी का कारण हो सकती हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर कमजोरी के साथ अचानक वजन कम होना, लगातार चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, बेहोशी, चलने में अचानक परेशानी या अत्यधिक थकान हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

60 साल के बाद उम्र बढ़ती है, लेकिन जीवन की सक्रियता खत्म होना जरूरी नहीं है।

संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, मानसिक रूप से सक्रिय रहना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच—ये सभी स्वस्थ उम्र बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उम्र को कमजोरी का बहाना नहीं, स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल का अवसर बनाइए।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, दवा या विशेष कमजोरी की स्थिति में योग्य चिकित्सक की सलाह लें।


Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. क्या 60 साल के बाद कमजोरी आना सामान्य है?
हल्की शारीरिक क्षमता में कमी उम्र के साथ हो सकती है, लेकिन लगातार या बहुत अधिक कमजोरी को केवल उम्र का असर नहीं मानना चाहिए।

Q2. 60 साल के बाद ताकत कैसे बनाए रखें?
संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित पैदल चलना और उम्र के अनुकूल मांसपेशियों के व्यायाम मददगार हो सकते हैं।

Q3. 60 साल के व्यक्ति को कितना व्यायाम करना चाहिए?
व्यायाम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक क्षमता के अनुसार होना चाहिए। शुरुआत हल्की गतिविधियों से की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह ली जा सकती है।

Q4. क्या कमजोरी पोषण की कमी के कारण हो सकती है?
हां, कुछ पोषक तत्वों की कमी कमजोरी या थकान में योगदान कर सकती है। लगातार समस्या होने पर जांच कराना बेहतर है।

Q5. क्या 60 के बाद भी व्यक्ति फिट रह सकता है?
बिल्कुल। नियमित गतिविधि, अच्छा पोषण, पर्याप्त नींद और स्वास्थ्य की उचित देखभाल से व्यक्ति लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

पूरे शरीर में दर्द होने के क्या कारण हो सकते हैं?

 पूरे शरीर में दर्द होने के क्या कारण हो सकते हैं?

#Dr.VirenderMadhan

Body Pain Causes:-

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 शरीर में लगातार होता रहता है दर्द, तो जानें क्या हो सकती है वजह?

*1– नींद की कमी:–

 रोज़ 6 से 8 घंटे की नींद लेना ज़रूरी है।अधुरी नींद के कारण भी 

*2– पानी की कमी:-

 आप इस बात का अहसास शायद ही हो, लेकिन शरीर में पानी की कमी दर्द का कारण बन सकते हैं।थकान, और अधिक प्यास हो सकती है

*3– आप तनाव में हैं तो हाई,बी.पी. हो सकता है जिसके कारण से बदन दर्द बन सकता है

*4– आयरन की कमी होने पर भी शरीर में दर्द होता है 

*5– विटामिन-डी की कमी है तो इसके लिये रोगी को घुप मे भी रहना चाहिए

*6– आर्थराइटिस 

*7– फटीग संड्रोम 

*8– सर्दी और खांसी होने पर भी शरीर में दर्द हो जाता है

#शरीर में दर्द किसकी कमी से होता है?

आयुर्वेद के अनुसार वात जब विकृत होता है तब शरीर में दर्द  होता है

– विटामिन-डी -

 विटामिन-डी की कमी से न सिर्फ पैरों में दर्द होता है बल्कि मांसपेशियों में भी दर्द शुरू हो जाता है। शरीर में विटामिन-डी की कमी को पूरा करने के लिए आप कुछ समय के लिए रोजाना धूप में बैठें, इसके अलावा दूध, अंडे की जर्दी, इत्यादि का सेवन कर सकते हैं

जब पूरे शरीर में दर्द हो तो क्या करना चाहिए?

#बदन दर्द के घरेलू उपाय |

Body Pain Home Remedies

* मालिश To me

*नमक का पानी की सिकाई

* ठंडी सिंकाई

*Spend का उपयोग

* अदरक 

जब बहुत अधिक थकान हो, शरीर दर्द से टूट रहा हो तो पेन किलर लेने की बजाय आप गर्म दूध में हल्दी मिलाकर सेवन करें। और इसे पीने के बाद थोड़ी देर के लिए लेट जाएं या सो जाएं। कुछ ही घंटों की नींद के बाद आप एकदम फ्रेश फील करेंगे और शरीर का दर्द और थकान कहीं गायब हो जाएंगे।

बरसात के दिनों में कौन-से फल खाएं? जानिए 10 सबसे फायदेमंद फल और उनके अद्भुत लाभ

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बरसात के दिनों में कौन-से फल खाएं? जानिए 10 सबसे फायदेमंद फल और उनके अद्भुत लाभ

भूमिका

बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली और ठंडक तो लाता है, लेकिन इस मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस का संक्रमण भी तेजी से बढ़ता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में जठराग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर हो जाती है, इसलिए भोजन और फलों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। यदि आप इस मौसम में सही फल खाते हैं, तो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है, पाचन अच्छा रहता है और कई मौसमी बीमारियों से बचाव हो सकता है।


आइए जानते हैं बरसात के मौसम में खाने योग्य 10 सबसे लाभकारी फलों के बारे में।


1. अनार 

अनार को वर्षा ऋतु का श्रेष्ठ फल माना गया है। यह रक्तवर्धक, पाचनवर्धक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला फल है।


लाभ


खून की कमी दूर करने में सहायक।


पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है।


शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।


संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।


2. सेब

सेब में फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं।


लाभ


रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।


हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक।


पाचन सुधारता है।


कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।


3. जामुन

जामुन वर्षा ऋतु का विशेष फल है और आयुर्वेद में इसे पाचन तथा मधुमेह नियंत्रण में सहायक माना गया है।


लाभ


पाचन तंत्र को मजबूत करता है।


रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक हो सकता है।


मुंह के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी।


एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर।


4. पपीता

पपीता हर मौसम में लाभकारी है, लेकिन बरसात में यह विशेष रूप से पाचन के लिए अच्छा माना जाता है।


लाभ


कब्ज दूर करने में सहायक।


भोजन को पचाने में मदद करता है।


त्वचा के लिए लाभकारी।


विटामिन A और C का अच्छा स्रोत।


5. नाशपाती

नाशपाती में पानी और फाइबर भरपूर होता है।


लाभ


शरीर को हाइड्रेट रखती है।


पाचन को बेहतर बनाती है।


वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है।


शरीर को ठंडक प्रदान करती है।


6. आलूबुखारा

आलूबुखारा विटामिन और खनिजों से भरपूर फल है।


लाभ


कब्ज में राहत।


हड्डियों के लिए लाभकारी।


रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक।


7. आड़ू (पीच)

आड़ू स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी है।


लाभ


विटामिन A और C का अच्छा स्रोत।


त्वचा और आंखों के लिए लाभकारी।


शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।


8. केला

यदि पाचन ठीक है तो सीमित मात्रा में केला भी खाया जा सकता है।


लाभ


तुरंत ऊर्जा देता है।


पोटैशियम का अच्छा स्रोत।


मांसपेशियों के लिए लाभकारी।


9. कीवी

कीवी विटामिन C से भरपूर फल है।


लाभ


रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक।


त्वचा के लिए लाभकारी।


एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर।


10. अमरूद

बरसात के अंतिम चरण में मिलने वाला अमरूद पौष्टिक फल है।


लाभ


विटामिन C का अच्छा स्रोत।


पाचन सुधारता है।


कब्ज में लाभकारी।


बरसात में फल खाते समय बरतें ये सावधानियां

फल हमेशा स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर ही खाएं।


कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में न रखें।


सड़क किनारे कटे हुए फल खाने से बचें।


केवल ताजे और मौसमी फल ही चुनें।


सड़े-गले या बदबू वाले फल बिल्कुल न खाएं।


मधुमेह के रोगी फलों का सेवन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करें।


आयुर्वेद की सलाह

आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में अत्यधिक ठंडे, बासी या दूषित खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। ताजे, स्वच्छ और मौसमी फलों का संतुलित मात्रा में सेवन पाचन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है।


निष्कर्ष

बरसात के मौसम में सही फल चुनना स्वास्थ्य की रक्षा का सरल और प्रभावी तरीका है। अनार, सेब, जामुन, पपीता, नाशपाती, आलूबुखारा, आड़ू, केला, कीवी और अमरूद जैसे फल संतुलित मात्रा में खाने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और मौसमी संक्रमणों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। स्वच्छता का ध्यान रखें और ताजे फलों को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं।


अस्वीकरण:

 यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सक या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

जब लीवर मे गंदगी हो जाये तो कैसे जाने लीवर की गंदगी कैसे साफ करें?


जब लीवर मे गंदगी हो जाये तो कैसे जाने

लीवर की गंदगी कैसे साफ करें?

खराब लीवर के लक्षण:–

– पेट दर्द और सूजन

– पैरों और टखनों में सूजन

– स्किन में खुजली होना

– पेशाब का रंग गहरा होना

– पीला मल का रंग

– बेहद थकावट

– मतली या उलटी

#जब लीवर में गंदगी हो तो क्या करना चाहिए?

*लिवर की गंदगी को साफ करने के लिए हल्दी का प्रयोग करें। हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आपके लिवर को साफ कर सकते हैं। इसकी करक्यूमीन आपके शरीर की सूजन को कम कर सकता है। साथ ही लिवर के आसपास जमा अतिरिक्त फैट को कम करता है।

#लीवर की गंदगी कैसे निकाले?

लीवर की सफाई करने के लिए लीवर फ्रेंडली डाइट का सेवन आवश्यक है। लीवर फ्रेंडली डाइट में –

सब्जियां, फल, साबुत अनाज, फलियां, नट्स, सीड्स, मछली, अंडे, ऑलिव ऑयल और नारियल तेल का सेवन असरदार होता है। लीवर को स्वस्थ रखने के लिए ग्लूटेन फूड, कैफीन, एल्कोहॉल से परहेज करें।

#लिवर की सफाई के लिए क्या खाएं?

* सब्जियां, फल, मेवे, लहसुन, हरी चाय, कॉफी, हल्दी, किण्वित उत्पाद, जैतून का तेल और अनाज जैसे खाद्य पदार्थ लीवर को साफ करने और विषहरण करने में मदद कर सकते हैं, तो उन्हें अपने दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए।

*लिवर के लिए सुबह क्या पीना चाहिए?

अगर आप लिवर को साफ रखना चाहते हैं तो रोज सुबह एक गिलास नींबू पानी जरूर पिएं. वहीं हल्दी आपके लिवर को डैमेज होने से बचाने में मददगार है. साथ ही लिवर पर चढ़ी चर्बी भी कम करती है.

#लीवर साफ करने के घरेलू उपाय

– हरी पत्‍तेदार सब्जियों का करें सेवन लीवर हेल्दी रहता है।हरी-पत्तेदार सब्जियां लीवर की सफाई करने में बेहद फायदेमंद हैं। 

लहसुन से करें लीवर की सफाई:–

* लहसुन लीवर को डिटॉक्सीफाई करने में काफी लाभदायक है।

* हल्दी से करें लीवर को डिटॉक्स कर सकते है

* एवोकाडो से भी लीवर की सफाई मे मदद मिलती है

*पत्ता गोभी खाएं लीवर साफ रहेगा

Q:-अपने लिवर को ठीक करने का सबसे तेज़ तरीका क्या है?

क्षति को ठीक करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जो कुछ भी इसका कारण बन रहा है उसे हटा दिया जाए । उदाहरण के लिए, यदि आपको शराब पीने के कारण फैटी लीवर की समस्या है, तो शराब पीना बंद करना महत्वपूर्ण है। यदि यह आपके आहार या अधिक वजन के कारण है, तो स्वस्थ भोजन करना और वजन कम करना महत्वपूर्ण है।

Q:–लीवर खराब होने पर क्या परहेज करें?

लीवर की बीमारियों से बचाव करने के लिए वजन को कंट्रोल करना जरूरी है। 

पेट में वसा का निर्माण और अधिक वजन होने से लीवर रोग का खतरा बढ़ जाता है। लीवर को हेल्दी रखने के लिए कैलोरी, वसा और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट जैसे तेल, घी, पनीर, और शक्कर युक्त पेय से परहेज करें।

Heart Attack की पहचान और उपाय कैसे करें

 Heart Attack की पहचान और उपाय कैसे करें

Common Symptoms of Heart Attack in Hindi

– सीने में दर्द (Chest Pain)

– जकड़न (Chest Tightness)

– कंधो में दर्द (Shoulder Pain)

– थकान (Tiredness)

–नींद न आना (Difficulty in Sleeping)

–दिल की धड़कन तेज़ होना (Irregular Heart Beats)

–साँस फूलना (Breathlessness)

– साँस लेने में तकलीफ होना (Difficulty in Breathing)


हार्ट अटैक आने से पहले क्या लक्षण होता है?

* सीने में दर्द होना :–

 अगर आपको सीने बाईं तरफ तेजी से दर्द हो रहा है और जकड़न महसूस हो रही है तो यह हार्ट अटैक का शुरूआती संकेत हो सकता है। 

* सांस लेने में दिक्कत:–

 पूरी तरह से सांस लेने के बाद भी आपको सांस की कमी महसूस हो रही है या फिर सांस लेने में समस्या हो रही है तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

#दिल का दौरा पड़ने के लक्षण क्या हैं?

– सीने में दर्द या बेचैनी महसूस कर सकता है तथा उसे दबाव, जकड़न या निचोड़ने जैसा महसूस हो सकता है जब उसे दिल का दौरा पड़ता है। 

– दर्द बाहों, गर्दन, जबड़े या पीठ तक भी वितरित हो सकता है। अन्य लक्षणों में सांस की तकलीफ, मतली या उल्टी, हल्कापन, या ठंडा पसीना शामिल हो सकता है।

#Heart Attack के लिए सावधानी:-

* तंबाकू उत्पादों के सेवन से बचें

* वजन कम करें

यदि आप अधिक वजन वाले या मोटे हैं तो अपना वजन कम करें

* योग, व्यायाम और पैदल चलने जैसी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं

* सुखी और सकारात्मक जीवन जिएं

* तला हुआ भोजन, पैकेज्ड भोजन और प्रसंस्कृत भोजन सहित अस्वास्थ्यकर भोजन से बचें

* ऐसा खाना खाएं जो दिल के लिए स्वस्थ हो

* धूम्रपान छोडे

#Heart Attack से बचने के लिए

* लहसुन का सेवन करके भी आप हार्ट ब्लॉकेज की समस्या से निजात पा सकते है। 

* हल्दी के सेवन भी हार्ट ब्लॉकेज को खोलने के बेहतरीन उपाय है। 

* तुलसी से करें हार्ट ब्लॉकेज समस्या का हल। 

* अदरक भी बेहतरीन उपाय है हार्ट ब्लॉकेज को खोलने का,

* सेब खाने से धमनियों में रुकावट और स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है। यह फल हमारे रक्त में वसा के स्तर को कम करने और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए भी जाना जाता है। सेब के छिलके में फ्लेवोनोइड्स नामक यौगिक होते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट आपके हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकते हैं।

*अर्जुन एक अद्भुत जड़ी बूटी है जो हृदय स्वास्थ्य को मैनेज करने में मदद करती है. 

अर्जुन की छाल का चूर्ण अपने कार्डियो-सुरक्षात्मक गुण के कारण हृदय की रक्षा करता है. यह हृदय टॉनिक के रूप में कार्य करता है और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करके हृदय के समुचित कार्य को मैनेज करने में मदद करता है.1

#शरीर की नसें खोलने के लिए क्या खाना चाहिए?

*विटामिन सी-

नसों में ताकत भरने के लिए विटामिन सी से भरपूर चीजों का पर्याप्त सेवन करना चाहिए. * इसके लिए फूलगोभी, बंदगोभी, स्ट्रॉबेरी, अन्नास, डार्क लीफी वेजिटेबल, स्प्रॉउट, संतरे, बेल पेपर आदि का सेवन रोजाना करें. 

* विटामिन ई-

कमजोर नसों में जान भरने के लिए विटामिन ई से भरपूर फूड का सेवन करना होगा.

* अनार नसों को खोलने में असरदार हो सकता है

* चेरी का सेवन करें

* जीरा पानी पिएं

* मुलेठी की चाय फायदेमंद होती है

Petha Juice पेठे का जूस–सबसे शक्तिशाली डिटोक्स जूस


 Petha Juice पेठे का जूस–सबसे शक्तिशाली डिटोक्स जूस

#डा०वीरेंद्रमढान

#सफेद पेठे का जूस पीने के फायदे (Benefits of drinking ash gourd juice)


पाचन तंत्र के लिए:–

सफेद कद्दू का सेवन करने पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा मात्रा में सफेद कद्दू का सेवन करने से पेट खराब, उल्टी, दस्त जैसी समस्या हो सकती है।

सफेद पेठे का जूस पाचन बेहतर करने में कारगर होता है

 सफेद पेठे का जूस पाचन तंत्र को आराम देता है। सफेद पेठे में कैलोरी कम होती है। सफेद पेठे के सेवन से मेटाबॉलिज्म अच्छा रहता है। जिससे खाना आसानी से पचाया जा सकता है।

* बॉडी को रखे हाइड्रेटेड 

* एंटी इंफ्लेमेटरी गुण रखता है

* शुगर को करे कंट्रोल 

* सांस से जुड़ी समस्याओं का इलाज है सफेद पेठे का जूस

* सफेद पेठे के जूस का सेवन सुबह खाली पेट करना बेहतर होता है. खाली पेट लेने पर इस जूस के पोषक तत्व अवशोषण और पाचन गुण अधिक होते हैं.



* नहीं रहेगी गैस और कब्ज की दिक्कत

–  सफेद पेठे में एंटी-ऑक्सीडेंट, गेस्ट्रो-प्रोटेक्टिव जैसे गुण पाए जाते हैं जो गैस और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार हैं। अगर आप भी कब्‍ज (Constipation) की समस्‍या से परेशान हैं तो सफेद पेठे के जूस का सेवन नियमित रूप से करें। इसे पीने से पेट में जलन की समस्या भी खत्म होती है।

* प्रतिदिन एक गिलास सफेद पेठे का जूस पीने से वजन घटाने में असरदार होता है.

#सफेद कद्दू की तासीर क्या है?

* सफेद कद्दू में पानी की भरपूर मात्रा और ठंडी तासीर शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ बॉडी को कूल भी बनाए रखती है।   *सफेद कद्दू का सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के साथ शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

* सफेद कद्दू में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण अस्थमा और गठिया रोग में फायदेमंद होते हैं।

बलगम क्या हैऔर क्यों बनता है?


बलगम क्या हैऔर क्यों बनता है?

Dr.Virender Madham

कफ क्या है?

बलगम एक फिसलन भरा तरल पदार्थ है जो आपके शरीर द्वारा प्राकृतिक रूप से निर्मित होता है। यह मुंह, नाक, गला, पेट, आंत और गर्भाशय ग्रीवा सहित अंगों में ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। यद्यपि बलगम का उत्पादन प्राकृतिक और स्वस्थ है, अधिक बलगम का उत्पादन सामान्य सर्दी सहित बीमारी का संकेत हो सकता है।

दरअसल बलगम श्वसन तंत्र को लुब्रिकेट और फिल्टर करने में मदद करता है। यह म्यूकस मेम्ब्रेन से बना होता है। यह नाक से फेफड़ों तक (mucus build up in the throat) रहता है।

आयुर्वेद के अनुसार-

कफ मूलतः पृथ्वी और जल घटकों से बना है। यह भारी, धीमा, ठंडा, चिकना, चिकना, नाजुक, गाढ़ा, स्थिर, स्थूल और बादलदार है। कफ सभी चीजों को संरचना और मजबूती प्रदान करता है

कफ कितने प्रकार का होता है?

कफ पांच प्रकार के होते हैं

अपने विशिष्ट कार्य के आधार पर, कफ दोष को अवलंबक कफ, क्लेदका कफ, तारपका कफ, बोधक कफ और स्लेशका कफ में उप-विभाजित किया गया है।

कफ के गुण:–

तृप्ति, तन्द्रा, निद्राघिक्य,गुरुगात्र, आलस्य, मुखमाधुर्य, मलाधिक्य, अग्निमांद्य आदि कफ के गुण होते है

कफ दोष बढने के कारण–

कफ कई कारणों से हो सकते हैं जैसे- इंफेक्शन, एलर्जी, फेफड़ों में इंफेक्शन, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया आदि. डिहाइड्रेशन की वजह कफ बढ़ने लगता है. इसलिए जितना हो सके खुद भी पानी पिएं और अपने बच्चे को भी पानी पिलाएं. ताकि आप पूरे दिन हाइड्रेट रहें.

कफ दोष के लक्षण–

अत्यधिक बलगम के साथ ठंड

साइनस

मल त्याग में परेशानी

अचानक वजन बढ़ना

शारीरिक शक्ति में कमजोरी ।

कफ को संतुलित करने के उपाय:–

कफ मे सेवन किया जाने वाला आहार

कम वसा वाले दूध का सेवन करें। दूध को पीने से पहले हमेशा उबालें, जिससे यह पचने में आसान हो जाता है , दूध में कफ बढ़ाने वाले गुणों को कम करने के लिए दूध को उबालने से पहले उसमें हल्दी या अदरक मिलाने का प्रयास करें।

सेब और नाशपाती जैसे हल्के फल खाएं। 

– संतरे, केला, खजूर, अंजीर, अनानास, नारियल, खरबूजे और एवोकाडो जैसे भारी और खट्टे फलों से बचें। ये फल शरीर में कफ बढ़ा सकते हैं.

चीनी उत्पादों का सेवन कम करें क्योंकि ये शरीर में कफ को बढ़ाते हैं। हालाँकि, शहद का सेवन किया जा सकता है, यह कफ को संतुलित करने में उत्कृष्ट है।

टोफू को छोड़कर बीन्स ले सकते हैं

नट्स खाने से बचें

अनाज विशेषकर जौ और बाजरा ले सकते हैं।

– गेहूं और चावल का अधिक सेवन करने से बचें क्योंकि ये कफ बढ़ाते हैं

नमक को छोड़कर सभी मसाले लिये जा सकते हैं

टमाटर, तोरई, खीरे, शकरकंद से बचें क्योंकि ये कफ बढ़ाते हैं

क्या करें–

* हल्दी- हल्दी

 एक लाजवाब मसाला है। 

अदरक की चाय- अदरक एक अत्यधिक अनुकूलनीय घटक है। 

– नमक के पानी से गरारे करें .